भोपाल (एमपी मिरर)। मप्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है, फिर भी सरकार इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा है। प्रदेश के हजारों स्कूल शिक्षकविहीन हैं और इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। जनशिक्षा अधिकार संरक्षण समिति के अध्यक्ष रमाकांत पांडे ने बताया कि स्कूल संचालन की केवल प्रशासकीय खानापूर्ति हो रही है। इसका समाधान खोजने में प्रशासनिक तंत्र की कोई रुचि नहीं है। पांडे ने बताया कि जनशिक्षा अधिकार संरक्षण समिति इस संबंध में प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक को अवगत करा चुकी है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगा और स्कूलों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। यही कारण है कि अभिभावक सरकारी स्कूलों को छोड़कर निजी स्कूलों का सहारा ले रहे हैं।
भोपाल (एमपी मिरर)। मध्यप्रदेश मे शासकीय स्कूलों मे पढने वाले बच्चों को केन्द्रीय सरकार की मदद से कम्प्यूटर का टेक्निकल ज्ञान आधारित शिक्षा देने के लिए वर्ष 2003 से लगातार प्रदेश के राज्य शिक्षण संस्थान को पहली किस्त मे करीब 100 करोड का बजट दिया गया था। DPI ने अपने शर्तों के साथ देश भर की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र मे कार्य करने वाली बडी कंपनियों को स्कूलों मे कम्प्यूटर लेब बनाने के लिए निविदा आमंत्रित की थी। कुछ कंपनियों से लाखो का खर्चा कर डेमो कम्प्यूटर लेब भी बनवाई गई। बाद मे तकनीकि खामी बताकर बंद कर दिया गया।
भोपाल (एमपी मिरर)। मप्र के भोपाल में देश के अन्य शहरों की अपेक्षा सबसे महंगा पेट्रोल बिक रहा है, जबकि अन्य राज्यों में पेट्रोल की कीमत काफी कम है। भोपाल में पेट्रोल की कीमत 76.17 रुपए है, जबकि देश के अन्य शहरों में काफी कम है। मप्र सरकार पेट्रोल पर कई तरह के टैक्स वसूल रही है, जिस कारण पेट्रोल की कीमत मप्र में सबसे अधिक है।...